G20 and G7 summit
आज हम इस ब्लाग के जरिए जी7 (G7) और जी20 (G20) के बारे में जानेंगे। जी7 (G7) और जी20 (G20) क्या होता है?, ये कब बनें? इनकी क्यों जरूरत पड़ी? इन मुद्दों पर बात करेंगें।
जी7 (G7) और जी20 (G20) दो अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संगठन हैं,
जो वैश्विक आर्थिक गवर्नेंस और सहयोग के
लिए बनाए गए हैं। ये संगठन विशेष रूप से देश के वित्त मंत्री और मध्यबैंक के
गवर्नर्स के बैठक के रूप में होते हैं।
जी7 (G7)-
- मूल आरंभ (1973): G7 का इतिहास 1970 के दशक में जाकर लौटता है, जब दुनिया का सामृद्धिक संकट सामना कर रही थी, जिसमें ब्रेटन वुड्स के निश्चित मूल्य दर प्रणाली का पतन शामिल था। 1973 में, एक पुस्तकालय समूह जिसे "लाइब्रेरी ग्रुप" या "ग्रुप ऑफ सिक्स" कहा जाता था, की पहली बैठक आयोजित हुई। मूल सदस्य थे: फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, संयुक्त राज्य (यूएस), और संयुक्त राज्य (यूके).
- कैनडा का सम्मिलन (1976): 1976 में, कैनडा ने इस समूह में शामिल होने का निर्णय लिया, जिससे इसे "सात गुप्त" में विस्तारित किया गया। कैनडा के शामिल होने का मुख्य कारण उसके संयुक्त राज्य (यूएस) के साथ मजबूत आर्थिक संबंध थे।
- सम्मेलन बैठक (1970 के दशक के अंत): G7 देशों ने वार्षिक शिखर सम्मेलन बैठक आयोजित करना शुरू किया, जहां नेता विभिन्न आर्थिक मुद्दों पर चर्चा करते थे। इन सम्मेलनों ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का समाधान ढूंढने के लिए नीतियों को समन्वयित करने के रूप में कार्य किया।
- G8 में विस्तार (1997): 1997 में, रूस को इस समूह में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया, जिससे इसे G8 में बदल दिया गया। रूस के शामिल होने को ठीक तरीके से सामृद्धिक संकट के बाद दुनिया के आर्थिक तंत्र में इंटीग्रेट करने का प्रयास माना गया था। हालांकि, रूस के क्राइमिया के अधिग्रहण के बाद उसकी सदस्यता को 2014 में निलंबित कर दिया गया और समूह को फिर से G7 में बदल दिया गया।
- मुख्य विषय: वर्षों के साथ, G7 ने विभिन्न आर्थिक और वित्तीय विषयों पर चर्चा की है, जैसे व्यापार, मुद्रा निर्देशन दरें, वित्तीय नीतियाँ, और मुद्रा विनिमय दरें। इसने जलवायु परिवर्तन, वैश्विक स्वास्थ्य, और भू-राजनीतिक तनाव जैसे व्यापक वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की है।
- भूमिका और प्रभाव: G7 ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसने विभिन्न आर्थिक मुद्दों पर बयान और समझौतों का जारी किया है, और इसके सदस्य देश अक्सर महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर अपने स्थितियों को समन्वयित करते हैं।
- G20 और
G7
का सहयोग: G20, एक
बड़ा अर्थशास्त्री देशों का समूह, 1999 में विश्वासिक आर्थिक चुनौतियों का
समाधान करने के लिए स्थापित किया गया था। हांलांकि G20 अधिक
प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण मंच बन गया है, G7 वार्षिक
शिखर सम्मेलनों को आयोजित करने में जारी रहता है और अपने आप में प्रभावशाली
बना है।
G7 एक
छोटा सा समूह है जिसमें 7 प्रमुख
औद्योगिक देश शामिल हैं। ये देश हैं:
- संयुक्त
राज्य (अमेरिका)
- संयुक्त
राज्य (यूके)
- कैनडा
- फ्रांस
- जर्मनी
- इटली
- जापान
G7 का
उद्देश्य वैश्विक आर्थिक स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देना है। इस समूह का मुख्य
उद्देश्य नीति समन्वय और आर्थिक चुनौतियों का समाधान निकालना है।
जी20 (G20):
- मूल आरंभ (1999): G20 का इतिहास 1999 में है जब यह ग्रुप पहली बार मिलकर बनाया गया। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक आर्थिक मुद्दों के समाधान के लिए एक मंच प्रदान करना था। G20 का गठन उन अर्थशास्त्री देशों ने किया जिनका अर्थशास्त्रीक प्रभाव महत्वपूर्ण था और जो दुनिया की आर्थिक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
- सम्मेलनों का आयोजन (2008): G20 के सदस्य देशों ने अपनी पहली शिखर सम्मेलन को 2008 में आयोजित किया, जब वैश्विक आर्थिक महामारी की आग में आर्थिक संकट था। इस सम्मेलन में वे निर्णय लिए जिन्होंने आर्थिक संकट के समाधान के लिए संयुक्त कदम उठाने का प्रस्तावित किया।
- आर्थिक सहयोग (जारी है): G20 के सदस्य देश समृद्धि, व्यापार, वित्त, और अन्य आर्थिक मुद्दों पर चर्चा करते हैं और साथ में कदम उठाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य है वैश्विक आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देना और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का समाधान निकालना।
- आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर समझौते: G20 ने आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर कई समझौते किए हैं, जैसे कि फिस्कल पॉलिसी, वित्तीय संरक्षण, और आर्थिक सुधारों का समर्थन।
- आर्थिक मामलों के साथ गैर-आर्थिक मुद्दे: G20 ने अपने मुख्य उद्देश्य के अलावा गैर-आर्थिक मुद्दों पर भी चर्चा की है, जैसे कि जलवायु परिवर्तन, वैश्विक स्वास्थ्य, और अन्य वैश्विक मुद्दे।
- सदस्यों की विशेषता: G20 में 19 देश और यूरोपियन यूनियन शामिल हैं, जो वैश्विक आर्थिक प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये देश हैं: अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कैनडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरबिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, संयुक्त राज्य, और यूरोपियन यूनियन।
G20 एक महत्वपूर्ण
अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संगठन है जो वैश्विक आर्थिक मुद्दों का समाधान ढूंढने और
वैश्विक आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है।
G20 एक बड़ा
अंतरराष्ट्रीय मंच है जिसमें 19 प्रमुख
औद्योगिक और उभरते हुए अर्थव्यवस्थाओं के साथ यूरोपीय संघ शामिल है। ये देश हैं:
- अर्जेंटीना
- ऑस्ट्रेलिया
- ब्राजील
- कैनडा
- चीन
- फ्रांस
- जर्मनी
- भारत
- इंडोनेशिया
- इटली
- जापान
- मेक्सिको
- रूस
- सउदी
अरब
- दक्षिण
अफ्रीका
- दक्षिण
कोरिया
- तुर्की
- यूनाइटेड
किंगडम (यूके)
- संयुक्त
राज्य (अमेरिका)
- यूरोपीय
संघ
जी20 का उद्देश्य वैश्विक आर्थिक मुद्दों और
चुनौतियों का समाधान करना है। इस मंच ने आर्थिक नीति समन्वय, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय स्थिरता, व्यापार और विकास के क्षेत्र में निर्णय
लिए हैं।
ये दोनों संगठन
वैश्विक आर्थिक सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन जी20 बड़ा है और इसमें अधिक देश शामिल हैं,
इसलिए इसका प्रभाव भी अधिक होता है।
G20 के अध्यक्ष (अध्यक्ष)
का चयन हर वर्ष बदलता है। राष्ट्रपति का चयन व्यक्ति के देश के प्रधान मंत्री या
राष्ट्रपति के रूप में होता है। व्यक्ति का चयन हमें देश के साथ योजना और समर्थन
के आधार पर होता है, जहां
जी20 सम्मेलन आयोजित होता
है।
G20 का वार्षिक सम्मेलन
हर साल एक G20 देश
में होता है, और हमारे देश के
प्रधान मंत्री या राष्ट्रपति हमारे सम्मेलन की अध्यक्ष की भूमिका निभाते हैं। इसके
अलावा, अध्यक्ष के चुनाव का
प्रबंधन, सम्मेलन के विशेष
कार्यक्रम, और अध्यक्ष के
कार्यकर्ताओं को संभालने के लिए एक चक्रवर्ती अध्यक्ष (शेरपा) का भी चयन होता है।
जी20 अध्यक्ष का कार्यसम्मेलन की प्रशस्ति
व्यवस्था, अधिवेशन के एजेंडे का
निर्धारण करना, और
सम्मेलन में विचार-विमर्श को संभालना होता है। अध्यापक के रूप में चयन व्यक्ति के
देश के अर्थिक महौल, वर्तमान
समय के महत्वपूर्ण मुद्दों के आधार पर होता है, और यहां उनकी जिम्मेदारी होती है कि वह
सम्मेलन को सफल पूर्व संचलित करें।
इस प्रकार, जी20 की अध्यक्षता हर वर्ष अलग होती है,
और यह उस समय के माहौल और आर्थिक
स्थितियों के अनुकूल होती है।
