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Christmas Day -Jesus Christ's birth

 

क्रिसमस( Christmas ) क्यों इतना महत्वपूर्ण माना जाता है



प्रभु यीशु के जन्म के अवसर को लोग क्रिसमस डे के रूप में मनाते हैं। जीसस जिन्हें अरबी ज़ुबान में ईसा भी कहते हैं, इनका जिक्र पवित्र किताब कुरान शरीफ़ में कई बार हुआ है, यहां तक कि पैगंबर मोहम्मद से ज़्यादा बार हुआ । भारत में सभी धर्म के लोग इस त्यौहार को मिल-जुल कर मनाते हैं। आजकल ख़ासतौर पर इस त्यौहार को बच्चों का सबसे पंसदीदा माना जाता है। 20 वीं शताब्दी की शुरुआत में, यह एक धर्मनिरपेक्ष पारिवारिक अवकाश भी बन गया।  माना जाता है कि क्रिसमस की रात सांता क्लॉज (Santa Claus) आकर सभी की इच्छाओं को पूरा करते हैं। 

प्रभु ईसा मसीह ने एक मैरी नामक लड़की के पास एक अपना दूत भेजा जिसका नाम ग्रैबियल था मैरी के पास आकर प्रभु ईसा के दूत ने कहा कि उसे ईश्वर के पुत्र को जन्म देना है। इस बात को सुनकर मैरी जो कि कुंवारी लड़की थी चौककर बोली यह संभव नहीं है, क्योंकि मैं तो शादीशुदा नहीं हूं। ये सुनकर प्रभु ईसा मसीह के दूत ने बोला, ईश्वर सब कुछ सही कर देगें।

कुछ समय बीतने के बाद उस लड़की की शादी जोसेफ नामक व्यक्ति से हो गई। एक रात जब मैरी सो रही थी तो प्रभु का दूत आकर बोलता है कि तुम जल्दी से गर्भवती होने वाली हो और तुम्हारे गर्भ से प्रभु यीशु जन्म लेंगे। उस वक्त मैरी और जोसेफ नाजरथ में रहते थे जोकि इजराइल देश में है।  एक दिन किसी कारणवश जोसेफ और मैरी बैथलेहम नामक जगह पर गये जोकि फिलिस्तीन में है। वहां से आने के बाद दोनों को किसी भी धर्मशाला में जगह नहीं मिली क्योंकि वहां सभी जगह फुल थी । ख़ूब ढ़ूढ़ने के बाद जब वो थक गये उन्हें एक अस्तबल में  जगह मिल गयी। उस अस्तबल के पास कुछ गड़रिया अपनी भेड़ें चरे रहे थे। उस जगह पर प्रभु के दूत प्रकट हुए और उन गड़रियो को प्रभु यीशु के जन्म लेने के बारे में बताया। और उसके बाद मैरी ने प्रभु यीशु मसीह को जन्म दिया।




कुछ समय बाद प्रभु यीशु मसीह बड़े हुए फिर प्रभु ने जगह-जगह उपदेश देने लगे और लोगों पर अपनी कृपा बरसाने लगे । लोगों के दु:ख दर्द, बीमारी, दुर्बलता, तमाम तरह की परेशानियों को दूर करने लगे। सभी जगह प्रभु का गुणगान होने लगा । लोगों ने देखा कि प्रभु लोगों की सभी परेशानियां दूर करने लगे है तो इनके दुश्मनों ने अंत में प्रभु को बहुत यातनाएं दी और क्रूस पर लटकाकर दोनों हाथों में  कीलें ठोककर उनको मार डाला। लेकिन प्रभु की दयालुता देखिए जब इनको क्रूस पर लटकाया जा रहा था तो प्रभु कह रहे थे कि “ हे परमेश्वर ! इन लोगों को क्षमा कर दीजिए, क्योंकि यह लोग अज्ञानी हैं।”


जानते है क्रिसमस कब मनाया जाता है

क्रिसमस 25 दिसंबर को ग्रेगोरियन कैलेंडर में कई ईसाइयों द्वारा मनाया जाता है। पूर्वी रूढ़िवादी चर्चों के लिए जो जूलियन कैलेंडर का उपयोग जारी रखने के लिए जारी रखते हैं, यह तिथि ग्रेगोरियन कैलेंडर पर 7जनवरी से मेल खाती है। अधिकांश यूरोपीय देशों में क्रिसमस की पूर्व संध्या पर और उत्तरी अमेरिका में क्रिसमस की सुबह उपहारों का आदान-प्रदान किया जाता है।


क्या ऐसा माना जाता है कि क्रिसमस जर्मनी में शुरू हुआ

क्रिसमस जर्मनी में शुरू नहीं हुआ, लेकिन छुट्टियों की कई परंपराएं वहां शुरू हुईं, जिसमें पेड़ों को सजानट भी शामिल था। क्रिसमस का उत्सव रोम में करीबन 336 में शुरू हुआ, लेकिन 9वीं शताब्दी तक यह एक प्रमुख ईसाई त्योहार नहीं बन पाया ।



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