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ब्रह्म मुहूर्त में उठने के फायदे Benefits of getting up in Brahma Muhurta

 ब्रह्म मुहूर्त में उठने के फायदे

आज इस ब्लाक में बात करेंगें, ब्रह्म मुहूर्त Braham Muhurtas से जुड़ी तमाम तरह की जुड़ी महत्वपूर्ण बातों की। जो आपके लिए बेहद जरूरी है जिसे अपने जीवन में अवश्य  शामिल करना चाहिए। और आज इस  ब्लाक के जरिए आप बहुत-सी नई बातों को जानेंगे जो आपको नहीं पता होगीं।  जैसे  ब्रह्म मुहूर्त क्या होता है?,  ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे शुरू होता है?,  ब्रह्म मुहूर्त में उठकर मचाही चीज को कैसे प्राप्त कर सकते है? और अपने लक्ष्य पर कैसे फोकस रख सकते है?,  ब्रह्म मुहूर्त में उठकर अपने शरीर को कैसे स्वस्थ्य रख सकते है?  अपने मन को कैसे शांत रख सकते है?   तो आईए शुरू करते है.. 

 Brahma Muhurta Image



वर्णं कीर्तिं, मति लक्ष्मीं, स्वास्थ्यमायुश्र्च विदन्ति।

ब्राह्मे मुहूर्ते, संजाग्रच्छि वा, पंकज यथा।। 

अर्थात- ब्रह्म मुहुर्त में उठने से व्यक्ति को कमल जैसी सुन्दरताकीर्ति, धन, वैभव और लम्बा आयुष प्राप्त होता है

ब्रह्ममुहूर्ते या निद्रा, सा पुण्यक्षयकारिणी।

अर्थात ब्रह्म मुहूर्त में निद्रा पुण्य का नाश करने वाली होती है।

ब्राह्मे मुहूर्ते, उत्तिष्ठेत्, स्वस्थो रक्षार्थमायुष:।

तत्र सर्वार्थ, शान्त्यर्थं स्मारकेच्च मधुसूदनम्।।

अर्थात जो लोग बीमारी से मुक्त लम्बी जिंदगी जीना चाहते हैं।  उन्हें ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए

सनातन संस्कृति के अनुसार बताया गया है कि ब्रह्म मुहूर्तचमत्कारी पल या अमृतवेला  सूर्य उदय से ठीक 96 मिनट के पहले का वह चमत्कारी समय जिसका उपयोग करना यदि आप लोगों को आ गया तो कुछ ही समय के पश्चात् अपने जीवन में आये परिवर्तन को देखकर आप दंग रह जायेंगे और आप अपने किसी भी लक्ष्य को इतनी आसानी से पा लेंगे जिसके बारे में आपने कभी सोचा भी नहीं होगा

आप किसी भी स्किलस में इतनी जल्दी विशेषज्ञ बन जायेगें जिसे देखकर आप स्वयं भी हैरान रह जायेंगे। क्योंकि ब्रह्म मुहूर्त में किया गया कोई भी कार्य ठीक उसी तरह विकसित होता है जैसे कि पानी, खाद्य और सूर्य की उपस्थिति में कोई पौधा।

इसलिए इस समय को द क्रिएटिव ऑवर(The Creative Hour) भी कहा गया है और यह कोई जादू-टोना या अंधविश्वास की बात नहीं है। लेकिन ब्रह्म मुहूर्त के प्राचीन तथ्य को विज्ञान ने भी स्वीकार किया है।

अगर मनुस्मृति के अनुसार श्लोक  

ब्राह्मे मुहूर्ते बुध्येत् धर्मार्थौ चानु चिंतयेत्।

कायक्लेशांश्र्च तन्मूलान्वेद, तत्वार्थमेव च।।

अर्थात ब्रह्म मुहूर्त में हमें उठकर ध्यान और वेदों का ज्ञान लेना चाहिए। इतना कठिन कहे जाने वाले वेदों के अध्ययन को महर्षि मनु ने कहा कि इस मुहूर्त में उठकर वेदों का ज्ञान लेना चाहिए तो इसके पीछे जरूर कोई बहुत बड़ा कारण रहा होगा और हां सच में इसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण है। सनातन धर्म के साथ-साथ दूसरे धर्म के लोगों ने भी इस समय को प्रार्थना, धार्मिक अध्ययन, मनन, चिंतन और प्रयोजन के लिए माना है।

आप को बता दें इस समय के दौरान ब्रह्मांड में ऐसा क्या होता है? जो ब्रह्म मुहूर्त के समय को इतना पावरफुल बनाता है।

पहला है अच्छे मुहूर्त से शुरूआत, हम अच्छे कार्यों की शुरूआत हमेशा शुभ मुहूर्त देखकर ही करते है। जैसे कि गृह प्रवेश मुहूर्त, शादी करना आदि तो फिर हम महत्वपूर्ण दिन की शुरूआत अच्छे मुहूर्त से क्यों न करें।

लेकिन इससे पहले जानते हैं कि मुहूर्त किसे कहा जाता है?

1 मुहूर्त 2 घड़ी के बराबर होता है।

1घड़ी  24 मिनट के बराबर होती है

इसी प्रकार 2 घड़ी 48 मिनट के बराबर होती है। और 48 मिनट  1 मुहूर्त के बराबर होता है। 24 घंटे में 30 मुहूर्त होते है

29 वें क्रम का मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त  होता है और ज्ञान प्राप्ति, ब्रह्म प्राप्ति के लिए, लक्ष्य प्राप्ति के लिए और अपने सर्वांगीण विकास के लिए ये ब्रह्म मुहूर्त बहुत ही अनुकूल समय है। आप का लक्ष्य चाहे कुछ भी हो उस को प्राप्त करने के लिए आप को चाहिए एकाग्रता जिसमें कोई अंदरूनी या बाहरी चीज विचलित ना करे। और ऐसी एकाग्रता में फ्लो ऑफ लय में  आप जो भी कार्य करेंगे वह कार्य एकस्ट्रा ऑडिनरी होगा और इसी एकाग्रता के लिए योगी और मुनि लोग एकान्त की तलाश में पहाड़ों की गुफाओं में चले जाते है। लेकिन हम संसारियों के लिए परमात्मा ने एक ऐसा समय दिया है जिसमें पूरा ब्रह्मांड लक्ष्य प्राप्ति में हमारी मदद करता है और वह है ब्रह्म मुहूर्त।

तो आइए ये जानते है कि ब्रह्म मुहूर्त हमारी कैसे मदद करता है?

सनातन धर्म एक वैज्ञानिक जीवन पद्धति है और इस पद्धति में बताया गया है शाम का 6 से 9 का समय रुद्रकाल है जिसमें कभी भी सोना नहीं चाहिए।

9 से 12 बजे का समय राक्षस काल है जिसमें हमें किसी भी हालत में जगे हुये नहीं होना चाहिए। 

12 से 3 बजे का समय है गंधर्वकाल जिसमें हमें गहरी नींद आती है। 

और सुबह 3 से 6 बजे मनोहर काल के दौरान किसी भी हालत में हमें बिस्तर छोड़ देना चाहिए। क्योंकि मनोहर काल के दौरान हमारे इस यूनिवर्स में कॉश्मिक एनर्जी यानि की विश्व शक्ति का संचार सबसे ज्यादा होता है और इस दौरान किया गया मेडीटेशन इतना पावर फुल होता है कि आप को कुछ दिनों के अन्दर ही विशेष अनुभव होने लगेगा, विश्व शक्ति का लेबल इतना बढ़ जायेगा कि आप अपने Conscientiousness Intelligent में इसका असर देखने लगेंगे। ज्यादा से ज्यादा कॉश्मिक एनर्जी पाने के लिए योगी, साधु ब्रह्म मुहूर्त के दौरान मेडीटेशन करते है।

ऐसा बिल्कुल नहीं कॉश्मिक एनर्जी पाने के लिए आपको मेडीटेशन ही करना जरूरी है बिल्कुल नहीं । अगर इस समय के दौरान कंसर्टेशन के साथ किया गया  कोई भी काम चाहे वह पढ़ाई हो, प्लानिंग हो, मेडीटेशन हो या कुछ भी हो उस काम के रिजल्ट आपको एक्सट्रा ऑडिनरी ही मिलेंगे।

कॉश्मिक एनर्जी के बाद ब्रह्मांड एक और चीज देता  है न्यूनतम ध्वनि प्रदूषण।

क्या आप जानते है?

तेज आवाज़ का आपके दिमाग पर क्या असर पड़ता है? अगर नहीं जानते है तो आज जान लीजिए।

हमारे आसपास की आवाजें हमारे ब्लड प्रेशर को बढ़ाती है जिससे दिमाग ठीक तरह से कंसर्टेट नहीं कर पाता।

हैरी पाटर की लेखक जे के. रोलिंग बताती है हैरी पाटर लिखते समय बाहर की आवाज़ों  की वजह से कंसर्टेट नहीं कर पाती थी जिसकी वजह से उन्हें होटल में एक रूम लेना पड़ा था ताकि वह बाहर का अनवांटेड आवाजों से छुटकारा पाकर फोसक के साथ लिख सके। जब बात फोकस की आती है तो छोटी छोटी बातें भी अपना महत्व रखती है और जब सुबह के समय शान्त वातावरण में हम कोई भी कार्य करते है तब हम बहुत कम समय में बहुत ज्यादा प्राप्त करते है।

तीसरा है शुद्ध वातावरण।

क्या आप जानते है ब्रहम मुहूर्त के समय हमारा वातावरण सबसे प्योर फार्म में होता है। सुबह के समय वातावरण में 41 फीसदी ऑक्सीजन, और मात्र 4 फीसदी कार्बन डाई ऑक्साइड होती है। यानि की न्यूनतम प्रदूषण।

शुद्ध हवा से सैकड़ों फायदें होते है और इसका सबसे बड़ा फायदा यह है शुद्ध हवा हमें देती है  बहुत ज्यादा शक्ति  और तेज मस्तिष्क।

तो आपने जाना ब्रह्म मुहूर्त में ब्रहमांड और प्रकृति किस तरह से सहयोग करती है।

अब हम जानेंगे ब्रह्म मुहूर्त में हमारा शरीर किस तरह से सहयोग देता है?

आयुर्वेद में बताया गया है जल, अग्नि, पृथ्वी, वायु, आकाश इन पांच तत्वों से बना है और इन पांच तत्वों के मिलने से हमारे शरीर की मुख्य शक्ति का निर्माण होता है

वायु और आकाश से मिलकर वात बनता है।

वायु और अग्नि से मिलकर पित्त बनता है।

जल और पृथ्वीसे मिलकर कफ़ बनता है।

अब जो वात शक्ति होती है वह मानसिक कार्य करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है। शाम को 2 से 6 बजे तक और सुबह 2 से 6 तक वात शक्ति हमारे शरीर में प्रवाहित होती है इस समय को दौरान हमें रचनात्मक और बौधिक कार्य करने चाहिए। लेकिन वात शक्ति के दरम्यान मस्तिक से जुड़े कार्य क्यों करने चाहिए। तो यह जो वात शक्ति होती है वह हमारे शरीर के ऐसे चक्र से जुड़ी होती है जो आध्यात्मिक चेतना को बढ़ाता है जो हमारी भावनाओं को भक्ति, शुद्ध ईश्वर, प्रेम और निष्ठा की ओर मोड़ता है जिसका प्रतीक हिरण है। जो अत्यधिक ध्यान देने और चौकन्नेपन का बोधक है और सबसे ख़ास बात इस चक्र के देवता शिव और पार्वती है शिव, चेतना और पार्वती , प्रकृति का प्रतीक है। जिससे हमें ब्रह्म का ज्ञान होता है।और इस चक्र का नाम है अनाहत चक्र(Anhata Chakra or Heart Chakra)



और जब ब्रह्म मुहूर्त में वात शक्ति हमारे शरीर में प्रवाहित होती है ऐसे समय हम कोई बोधिक कार्य करते है तो यह अनाहत चक्र भी अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर देता है। अनाहत चक्र का रंग हल्का नीला आकाश का रंग है अनाहत का समान रूप तत्व वायु है। वायु प्रतीक है स्वतंत्रता और फैलाव का। आकाश प्रतीक है अनंतता का। जो हमारी रचनात्मकता और ज्ञान को अनन्त तक फैलाने में मदद करता है।

अनाहत चक्र से उदय होनी वाली दूसरी शक्ति संकल्प शक्ति है जो इच्छा पूर्ति की शक्ति है। आपका अनाहत चक्र जितना अधिक शुद्ध होगा उतनी ही शीघ्रता से आपकी इच्छा पूरी होगी। अच्छी गहरी नींद के बाद ब्रह्म मुहूर्त में ज्यादा शांत और क्रियाशील होता  है। यह एक ऐसा समय है जब ब्रह्मांड और हमारा शरीर सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर होता है। हमारा शरीर प्रकृति के बनाये नियमों के अनुसार चलना चाहिए। मसलन पानी में भी जब हम पानी की धारा के साथ तैरते है तो आसानी से तैर पाते है और धारा के विपरीत दिशा में तैरेगें है तो तैरने में काफी ज्यादा जोर लगाना पड़ेगा । तो इसलिए ऋषि, मुनियों ने मानसिक कार्यों को करने के लिए उठने की और उठकर जागृत होने की सलाह दी । प्रकृति आपका साथ दे रही है शरीर भी आपका साथ दे रहा है बस आपको जरूरत है प्रकृति और शरीर का साथ देने की।

दोस्तो ये कहानी आपको अच्छी लगे तो कमेंट में लिख कर अपनी दिनचर्या बतायें। और अपने दोस्तों में भी शेयर करें। धन्यवाद।

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