हीराबेन गांधीनगर के पास रायसन गांव में पीएम मोदी के छोटे भाई पंकज के साथ रहती थीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां हीराबेन का शुक्रवार आज सुबह में निधन हो गया । वह 99 वर्ष की थीं।
प्रधानमंत्री ने ट्वीट के जरिए लिखा, " शानदार शताब्दी का ईश्वर चरणों में विराम.. मां में, मैंने हमेशा उस त्रिमूर्ति को महसूस किया है, जिसमें तपस्वी की यात्रा, एक नि:स्वार्थ कर्मयोगी का प्रतीक और मूल्यों के प्रतिबद्ध जीवन समाहित रहा है। " माताजी के निधन की सूचना देते हूए भावभीनी श्रद्धांजलि।
प्रधानमंत्री को अपनी मां को कंधा देते हुए देखा गया उसके बाद शव को एंबुलेंस में रखा गया और प्रधानमंत्री भी उसमें चढ़ गये।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, हम इस कठिन समय में उनकी प्रार्थनाओं के लिए सभी को धन्यवाद देते हैं। यह सभी से विनम्र अनुरोध है कि वे दिवंगत आत्मा को अपने विचारों में रखें और अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम और प्रतिबद्धताओं को जारी को जारी रखें। यह हीराबेन को एक उचित श्रद्धांजलि होगी।
गौरतलब है कि हीराबेन गांधीनगर के पास रायसन गांव में पीएम मोदी के छोटे भाई पंकज मोदी के साथ रहती थीं। प्रधानमंत्री भी अक्सर रायसन जाते थे और अपनी गुजरात यात्राओं के दौरान अपनी मां के साथ समय भी बिताते थे।
आपको बता दें, इस साल जून महीने में पीएम मोदी ने अपनी मां के 99 वें जन्मदिन पर एक ब्लॉग में, मोदी जी ने अपनी मां के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर लिखा था, उन्होंने लिखा कि मां ने उनके दिमाग, व्यक्तित्व और आत्मविश्वास को आकार दिया।
मोदी जी अपने ब्लॉग पोस्ट में आगे लिखते है, मां का जन्मदिन शताब्दी वर्ष होने जा रहा है। अगर मेरे पिता जी जिंदा होते तो वह भी पिछले हफ्ते अपना 100वां जन्मदिन मनाते। 2022 एक विशेष वर्ष है क्योंकि मेरी मां का शुरू होने जा रहा है, और मेरे पिता जी शताब्दी पूरी कर चुके होंगे।
प्रधानमंत्री ने आगे ब्लॉग में लिखा , उनकी तुलना में उनकी मां का बचपन बेहद कठिन था, क्योंकि उन्होंवे अपने जीवन में अपनी मां को जल्दी खो दिया था और इस कारण से उन्हें पीड़ा होती थी।
प्रधानमंत्री ने अपनी पारिवारिक कठिनाई के शुरूआती दिनों को याद करते हुए लिखा, मां घर के खर्चों को पूरा करने के लिए कुछ घरों में बर्तन धोती थी। वह हमारी अल्प आय को पूरा करने के लिए चरखा चलाने के लिए भी समय निकालती थी।
प्रधानमंत्री जी आगे लिखते है, जब भी मैं उनसे मिलने गांधीनगर जाता हूं, तो वह मुझे अपने हाथों से मिठाई खिलाती हैं। और एक छोटे बच्चे की प्यारी मां की तरह, वह एक रूमाल निकालती है और खाना खत्म करने के बाद मेरा चेहरा पोंछ देती है। उसके पास हमेशा एक रूमाल या छोटा तौलिया होता है जो उनकी साड़ी में बंधी होता था।

