हिमाचल प्रदेश का एक गांव Village of Himachal Pradeshऐसा है। जहां कोरोना अपने पैर पसारने में नाकाम रह रहा where Corona could not knock । यह गांव सबस पुराने लोकतंत्र के नाम से मशहूर मलाणा गांव हैं। इस गांव ने कोरोना वायरस Corona Virus को बाहर रखने में कामयाबी पायी है।
आपको बता दें मलाणा पार्वती घाटी प्राकृतिक रूप से एकांत में एक छोर पर स्थित है। हिमाचल प्रदेश Himachal Pradesh के कुल्लू जिले का करीब 2350 आबादी वाला सबसे बड़ा गांव है। यह गांव पार्वती घाटी में चंद्रखानी और देओटिब्बा नाम की पहाड़ियों से घिरा है। ये मलाणा नदी के किनारे बसा है। यहां के लोग अपनी रीति-रिवाजों का बड़ी सख्ती के साथ पालन करने में माहिर है। इस गांव पर बहुत सी डाक्यूमेंट्रीज भी बनी है। यहां के लोग एक ऐसी भाषा बोलते हैं जो kanashi/Raksh के नाम से जानी जाती हैं। यह संस्कृत और कई तिब्बती बोलियों का मिश्रण लगती है।
यहाँ की एक और खास ये है कि मलाणा क्रीम भांग चरस मार्केट में सबसे महंगी और अच्छी चरस मानी जाती है। इसकी बड़ी वजह यह है कि चरस में पाए जाने वाला उच्च गुणवत्ता का तेल है। यहाँ स्थानीय पुलिस व प्रशासन मलाणा के भांग की खेती को हतोत्साहित करने के लिए कभी-कभी अभियान भी चलाते हैं। फिर भी काफी मात्रा में यहां से भांग की तस्करी बाहरी देशों में की जाती है।
कुछ साल पहले से बाहरी लोगों के लिए इसे पर्यटन के तौर पर खोल दिया गया है। गौरतलब है कि महामारी के ऐसे वक्त में ग्रामीण लोग फिर से एक बार अपनी पुरानी आदतों के प्रतिरूप में वापस आ गए हैं। और पिछले मार्च से बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसी वजह से आज भी हिमाचल प्रदेश Himachal Pradesh का यह मलाणा गांव में कोरोना वायरस Corona Virus का एक भी के सामने नहीं आया है।
