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People's Rights Story: लोगों के अधिकार और बेरोजगारों के रोजी-रोटी के सवाल

Poor Children Image


हर इंसान जब इस दुनिया में जन्म लेता है तो उसके साथ उसके कुछ अधिकार भी वजूद में आते हैं। मसलन, कुछ अधिकार हमें परिवार देता है, कुछ समाज और कुछ अधिकार हमारा मुल्क देता है, तो कुछ दुनिया। लेकिन आज भी दुनिया में बहुत से लोग ऐसे हैं जो या तो अपने अधिकारों से अनजान हैं या उनके अधिकारों का हनन किया जा रहा है। कभी जाति के आधार के नाम पर, कभी धर्म के नाम पर, कभी लिंग भेदभाव के जरिए, तो कभी रंग भेद नीति को अपनाकर लोगों के इन अधिकारों को कुचला जा रहा है। किसी भी इंसान की जिंदगी आजादी, बराबरी और सम्मान का अधिकार का नाम ही मानवाधिकार है।

 

आज हजारों बेरोजगारों को रोजी-रोटी के लिए सड़कों पर उतरना पड़ता है। तरह-तरह के ऑनलाइन कैंपेन चलाने पड़ते हैं लेकिन उसका कोई  भी नतीजा नहीं निकलता है। सरकारी महकमों में हजारों पद खाली पड़े हैं। लेकिन रोजगार देने की समान व्यवस्था न होने के कारण नियमित नियुक्तियां नहीं मिल पा रही हैं। सरकार स्थाई पदों पर भी संविदा अंशकालिक और आउटसोर्सिंग जैसे तरीके अपनाकर बेरोजगारों को उलझा रही है। रेलवे, कर्मचारी चयन आयोग आदि जैसे महकमों में नियुक्ति के लिए कई कई साल लग जाते हैं। आयोग में भर्तियां निकालने के ३ साल बाद उसको निरस्त करके फिर दोबारा  नये सिरे से नोटिफिकेशन निकाला जाता है। जिससे युवाओं का आधा जीवन इसी में व्यर्थ हो जाता है। किसी भी देश के लिए युवाओं से भी उस देश का भविष्य निर्मित होता है।

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