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मैं अकेला -सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला Suryakant Tripathi 'Nirala'

सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला   Suryakant Tripathi 'Nirala' हिन्दी कविता के छायावादी युग के चार  प्रमुख स्तंभों में से एक माने जाते हैं। उन्होंने उपन्यास, कहानियां, और निबंध भी लिखे  हैं लेकिन उनका ख्याति विशेष रूप से कविता के कारण ही हुई।

उनकी विशेष कविताओं में से एक कविता Poem नीचे दी गई है।

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मैं अकेला 

मैं अकेला;
देखता हूँ, आ रही
मेरे दिवस की सान्ध्य बेला ।

पके आधे बाल मेरे
हुए निष्प्रभ गाल मेरे,
चाल मेरी मन्द होती आ रही,
हट रहा मेला ।

जानता हूँ, नदी-झरने
जो मुझे थे पार करने,
कर चुका हूँ, हँस रहा यह देख,
कोई नहीं भेला ।

सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"

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