What is ChatGPT:
आजकल आप सभी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) OpenAI के बारे में खूब सुन रहे होगें । ये बहुत चर्चा में है। और अब इसको "चैटजीपीटी ChatGPT" (चैट जेनरेटिव प्री-ट्रेंड ट्रांसफॉर्मर Generative Pre-Trained Transformer) के जरिए हो रहा है। इसको एक वेबसाइट के जरिए नवंबर 2022 में "ओपन एआई Open AI" नामक कंपनी ने बनाया है। और देखते देखते ही लाखों लोग इससे जुड़ गए।
आखिर ये वेबसाइट लोगों को इतना आकर्षक क्यों कर रही है ? और आजकल क्यों ट्रेंड में है? इसका कारण है कि इस प्लेटफार्म पर आकर यूज़र अपने महत्वपूर्ण सवालों के उत्तर पा सकते हैं। इसलिए लोग इसका खूब यूज़ कर रहे है।
एआई( चैटजीपीटी) आने से भविष्य में युवा पीढ़ी पर असर
अब जानते है कि कैसे ये तकनीक मनुष्य की मौलिकता को खत्म कर सकती है, या कर रही है?
इसे एक उदाहरण से समझते है, किसी व्यक्ति को किसी अवसर पर विशेष कविता लिखनी है, तो वह इस तकनीक की सहायता से एक कविता लिख सकता है। इसक मतलब अब व्यक्ति एआई के जरिये लेखक भी बन सकते हैं। भले ही वे विचार शून्य और प्रतिभाहीन हों। बशर्तें वो इस तकनीक की जानकारी रखता हो।
अब जरा सोचकर देखिए यह कितनी खतरनाक स्थिति पैदा हो रही । अब मनुष्य की जगह मशीन सोचेगी और जवाब देगी तथा आदमी बैठकर पित्जा खाएगा। हां, तकनीकी में खामियां और अच्छाइयां दोनों होती है। कभी-कभी कोई महत्वपूर्ण जानकारी पाने के लिए हम "एआई" का इस्तेमाल जरूर करें, लेकिन मौलिक चिंतन या सृजन के लिए "एआई" का सहारा न लें ।
अब आप सोच रहे होगें कि फिर क्या करना चाहिए? तो इसका जवाब है ,आप इसके लिए ईश्वर द्वारा प्रदान मेधा का इस्तेमाल करेगें तो बेहतर होगा । जैसी कि हम जानते है, मेधा को तेज करने के लिए अध्ययन जरूरी है। लेकिन नई पीढ़ी के लिए ये सब बेकार की बातें हैं। वो ये सब नहीं करना चाहती है, क्योंकि वह सुविधाभोगी हो गई है।
जिस युवा पीढ़ी से हम कर्मठता और चपलता की उम्मीद करते हैं, वह इतना आलसी हो जाएगा, इसकी कल्पना नहीं की थी। खैर, ये तो समय-सापेक्ष विसंगतियां हैं। मसलन अब स्मार्ट फोन आ गए हैं, तो छोटे- छोटे बच्चे बाहर जाकर खेलने के बजाय मोबाइल चलाने में ही लगे रहते हैं। नन्हा शिशु भी मोबाइल पर कार्टून देखकर खाना खाना चाहता है।
चैटजीपीटी Chat GPT के जरिये हम अपने अनेक सवालों के जवाब पा सकते हैं। ये प्लेटफार्म बिल्कुल मनुष्य की तरह आपके हर सवाल का जवाब दे सकता है। धीरे- धीरे इस माध्यम से लाखों लोग जुड़ते चले जा रहे हैं। भविष्य में भी जुड़ते जाएंगे। बस, खतरा यही है कि इसका इस्तेमाल करते-करते लोग कहीं अपना मौलिक-चिंतन, मौलिक-मेधा ही न भूल जाएं। ये तो एक तरह से रचनात्मक चोरी हुई। यानि उधार का सिंदूर।
क्या ठीक हैं? क्या नहीं , आइए जानते हैं
जो ठीक है जैसे, छात्रों को पढ़ाई से सबंधित अनेक सवालों का समाधान इससे मिल सकता है।
व्यवसायी को एआई के जरिये कुछ टिप्स भी मिल सकते हैं।
और अनुवाद के जरिये किसी चीज को समझने में मदद मिल सकती है। या कुछ और भी चीजें हो सकती हैं।
अब जो ठीक नहीं है वो है, मौलिक सृजन का खत्म होना । जरा सोचिए तो फिर ईश्वर द्वारा प्रदान मेधा का क्या होगा? यदि लोग कृत्रिम मेधा का सहारा लेकर सोचना विचारना ही बंद कर देंगे, तो बौद्धिक जड़ता के जल्दी ही शिकार हो जाएंगे। इसलिए एआई का इस्तेमाल बहुत ही जरूरी चीजों पर ही करें आदत ना डाले। ज्यादा ज्यादा इसका इस्तेमाल ना करते जाएं।
"एआई" या "चैटजीपीटी" की सहारे ही रहने के आदी ना हो और अपनी बौद्धिक मेधा का जरूर इस्तेमाल करें।
